दुनिया मे पहली बार ऐसा समय देख रहे है जब इंसान ने

दुनिया मे पहली बार ऐसा समय देख रहे है जब इंसान ने

दुनिया मे पहली बार ऐसा समय देख रहे है
जब इंसान ने जीने के लिए
पैसा कमाना छोड़ दिया है..

इस कड़े इम्तेहान के दौर में,
इतना करम करना.
किसी ग़रीब का चूल्हा ना,
बुझने पाऐ इसका ख्याल रखना.

दुनिया मे पहली बार ऐसा समय देख रहे है

फूलदार पेड़ और गुणवान व्यक्ति ही झुकते हैं,
सुखा पेड़ और मुर्ख व्यक्ति कभी नहीं झुकते,

खाना खिलाने वालों, बांटने वालों
और घर घर खाना पहुंचाने वालों
खुदा तुम्हें इतनी दौलत दे कि
तुम्हारा खजाना कभी खत्म ना हो

थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते
और थक गया हूँ आराम करते करते

ख़ुशी के माहौल में
मौत का फ़रमान आ रहा है
जो कहते थे गाँव मे क्या रखा है
आज उन्हें भी गाँव याद आ रहा है..!

यूं पुरखों की जमीन बेचकर गांव से ना जाया करो..
कब छोड़ना पड़े शहर, गांव में भी एक घर बनाया करो..!

बात ये है कि बात कोई नही
मैं अकेला हूँ साथ कोई नहीं

“सब्र’ और “सच्चाई”
एक
ऐसी सवारी है
जो अपने सवार को
कभी
गिरने नहीं देती
ना किसी के कदमो में
और
ना किसी की नज़रों में”

अब नही है कद्र कोई यहाँ
किसी को एहसासों की…

हर किसी को फिक्र है तो बस
मतलब के ताल्लुक़ातो की…!!

“नि:स्वार्थ” “कर्म” करते रहो,
जो भी होगा, “अच्छा” ही होगा
थोड़ा “late” होगा,
पर “latest” होगा
“बुरा” करने का विचार आए तो,
“कल” पर टालो 🕊
“अच्छा”करने का विचार आए तो
“आज” ही कर डालो