इश्क है तो कुबूल कर लो सरेआम दुनिया के सामने; वो जो खंडहरों के पीछे होता है

इश्क है तो कुबूल कर लो सरेआम दुनिया के सामने;
वो जो खंडहरों के पीछे होता है उसे चुदाई कहते है

रोये हम इस कदर उनके सीने से लिपट कर;
वाह वाह!
रोये हम इस कदर उनके सीने से लिपट कर;
कि वोह खुद अपनी कमीज़ उतारकर बोली;
ले चूस ले कमीने, फालतू में नाटक मत कर!

 

 

डालते ही झड़ गए सब, टिका न कोई भी फूल गले में मेरे हार के;
दर्द उनको हुआ तो निकाल लिया मैंने, काँटा जो चुभा पैरों में सरकार के;
चीख उठे, चिल्ला उठे, कहने लगे मत लो मेरी;
एक ही चप्पल है और ऊपर से दिन भी हैं त्यौहार के।

इश्क है

कितना अधूरा लगता है…जब बादल हो और बारीश ना हो;
जब जिंदगी हो और प्यार ना हो;
आंखें हो पर ख्वाब ना हो;
जब खड़ा हो और जुगाड़ ना हो।

जुबाँ पे जब भी नाम तेरा आता है;
ये हाथ मेरा नीचे चला जाता है;
तुम्हें पाने के लिए कुछ भी कर जाऊंगा;
एक बार तो करने दे वरना हिला-हिला के मर जाऊंगा

रोये हम इस कदर उनके सीने से लिपट कर;
वाह वाह!
रोये हम इस कदर उनके सीने से लिपट कर;
कि वोह खुद अपनी कमीज़ उतारकर बोली;
ले चूस ले कमीने, फालतू में नाटक मत कर